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वर्ष: 3, अंक 56, मार्च(प्रथम) , 2019



मै धनवान हूँ


शिवेन्द्र मिश्र 'शिव'


        
भले नही धन औ दौलत है,
फिर भी मै धनवान हूँ ..
झूठ,कपट व द्वेष-भाव से,
बिल्कुल भी अनजान हूँ..
धन की पूंजी क्षणभंगुर है,
तुम्हें छोड़कर जायेगी, 
किन्तु प्रेम है,ऐसी दौलत..,
काम तुम्हारे आयेगी..
ना पैसा न बंगला-गाडी़
मै बेसक कंगाल हूँ..
प्यार,दुआएं,आशीर्वाद से,
पर मै मालामाल हूँ..
यह दौलत लोगों के दिल में,
तुमको स्थान दिलायेगी,
ईश्वर के घर में 'शिव' तुमको,
जो सम्मान दिलायेगी।
     

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