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वर्ष: 3, अंक 56, मार्च(प्रथम) , 2019



खूनी जहां


पूजा वर्मा


     
रहता था जहाँ प्यार सदा
करते थे जहाँ जान निसार
आज वह की जमी है खूनी
ओर खूनी है सारा जहां

खून से लतपथ है मंदिर मस्जिद
लतपथ है यहां का हर निशान
चाहते थे जहाँ जान से ज्यादा
आज प्यासा है यहां का हर इंसान

फ़िज़ा मैं जिसके चैन-ओ-अमन
हवा मैं जहां प्यार का नशा
आज घुली है नफरत वहां
ओर ये बना है दर्द-ए-जहां

होती थी जहाँ प्यार की बातें
करते थे जहाँ दिल-ए-इकरार
आज वहां पर बसी है नफरत
ओर ये बना है नफरत-ए-जहां

मिलते थे दो दिल जहाँ पे
करते थे आंखों से बयां
आज वहां आंखों मैं चुभन है
ओर ये बना है कातिल-ए-जहां
  

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