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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 63, जून(द्वितीय), 2019

अभी हाल दिल का सुनाया नही है

प्रीती श्रीवास्तव

अभी हाल दिल का सुनाया नही है। किसी को जख्म ये दिखाया नही है।। मेरे इश्क का है ऐसा असर दिलबर। उसने अब तलक मुझे भुलाया नही है।। मुहब्बत में किये कई वादे उसने। मगर उनको रहबर निभाया नही है।। बयां क्या करें उन गुनाहों को हरपल। जहां में ऐसा सनम पाया नही है।। दोस्त है कि दुश्मन वो मेरा पुराना। ये मेरे आज भी समझ आया नही है।। लुत्फ़ हम उठायें ऐसे कैसे दिलबर। सफर में मिला कोई भाया नही है।। कयामत न आ जाये इक रोज देखना। मेरा चांद घर मेरे आया नही है।।


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