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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 63, जून(द्वितीय), 2019

पुरूषार्थ

लवनीत मिश्रा

विपत्तियों मे मौन जो,
संकटों मे कौन वो,
व्यर्थ का विलाप क्यू,
मुख पर यह संताप क्यू,
क्यूँ मलीन मन अभी,
क्यूँ विवेक मौन है,
साहस से जो, आगे बढे,
उससे हराता कौन है,
पुरूषार्थ केवल बल नहीं,
नर नहीं नारी नहीं,
पुरूषार्थ युक्ति हल है जो,
जिसकी कोई सीमा नहीं,
संयम निडरता विवेक का,
पुरूषार्थ यहा हर एक का,
मिल कर करे सम्मान सब,
नर का भी, नारी का भी,
हिम्मत के आगे जीत है,
जो डर गया वो मौन है।

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