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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 62, जून(प्रथम), 2019

कभी खुद का भी दौरा किया कीजिए

सलिल सरोज

कभी खुद का भी दौरा किया कीजिए जो जहर है निगाहों में पिया कीजिए झूठी सूरत,झूठी सीरत और झूठा संसार सच के खिलने का आश्वासन भी दिया कीजिए हँसी मतलबी,आँसू नकली,बेमानी सब बातें ज़ुबाँ ही नहीं,तासीर को भी सिया कीजिए हवा में सारे वायदे,बेशक़्ल सारी तस्वीरें हिसाब को कभी तो कुछ लिख लिया कीजिए अपनी जात,अपनी बिरादरी,अपना महकमा बेवज़ह कुछ दूसरों के लिए भी किया कीजिए


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