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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 62, जून(प्रथम), 2019

ज़िन्दगी क्या है?

रत्ना सिन्हा

ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बता तो दे! कोई कहता ये समय है, तो कोई इसे काल का नया रूप और, कोई इसे काल चक्र भी है बताता! ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बता तो दे! कोई कहता ये ग़म है, तो कोई इसे ख़ुशी का नाम देता और, कोई एक ही सिक्के के दो पहलू है मानता इसे! ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बता तो दे! कोई कहता ये एक ख्वाब है, तो कोई इसे हक़ीक़त भी समझता और, कोई जीने की नई-नई राहें भी ढूँढता है खो-कर इसमें! ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बता तो दे! कोई कहता ये पुण्य है, तो कोई इसे पाप का भागीदार और, कोई पूर्व जन्मों का फल ये मानकर, धन्य हो जाता है इसे! ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बता तो दे! कोई कहता ये जन्म से जुड़ी है, तो कोई इसे मृत्यु से भी है बाँधता और, कोई अच्छे-बुरे कर्मों का फल ये मानकर स्वीकार भी कर लेता है इसे! ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बता तो दे! कोई कहता ये कर्म है, तो कोई इसे धर्म की पुंजी ही मानता और, कोई रामायण-महाभारत की तरह सम्पूर्ण जीवन का सार जान लेता है इसमें! ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बता तो दे! कोई कहता ये एक भूख है, तो कोई इसे प्यासा समन्दर भी कहता और, कोई आग की दरिया समझ कर डुबकी भी लगा लेता है इसमें! ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बता तो दे! कोई कहता ये शून्य है, तो कोई इसे परिपूर्ण भी है समझता और, कोई जानता इसे ब्रम्हाण्ड की सृष्टि पर, सबकी अलग ही है दृष्टि! ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बता तो दे! कोई कहता ये ज़रूरत है हमारी, तो कोई इसे मजबूरी की तरह आंकता और, कोई रोटी, कपड़ा और मकान की परिभाषा से भी तौलता है इसे; क्या सचमुच ये ही है ज़िन्दगी, इतनी तुच्छ? ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बतातो दे! इसकी परिभाषा चाहे हो जो भी, पर, इसकी ज़रूरत भी हमें तब समझ आती है, जब इसे खोने और पाने का डर हो; ज़िन्दगी क्या है, कोई ये बता तो दे!


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