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वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



हाथ लगाओ डर रही है


उमाशंकर सैनी


                                                                                                          
मछली जल की रानी है,
बचपन मे पढ़ी ये कहानी है ।

बेटियां मछली बनकर,
इस जमाने मर रही हैं।

हाथ लगाओ डर रही हैं,
बाहर निकालो मर रही हैं।

न जाने कितनी पीड़ा,
जन्मों से वो सह रही है।

कब समझेगा ये ना-समझ प्राणी,
गुड़िया तो है, पर हर घर की रानी है।

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