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वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



ससुराल में भी इक मायका होना चाहिए


सपना परिहार


 
जहाँ अलसुबह उठने की फ़िक्र न हो 
मेरे बारे में बुरी बातों का जिक्र न हो 
हाथों में चाय और सर पर  माँ का हाथ होना चाहिए ,
ससुराल में भी इक मायका होना चाहिए ......
 जहाँ गलती पर तानो की मार न हो
कभी अपनों में जीत-हार न हो
एक -दूजे की बात का सम्मान होना चाहिए,
मायके में भी इक ससुराल होना चाहिए ......
माँ के जैसे सासू से रुठा -मनाई हो
भाभी जैसे जेठानी में हँसी-ठिठाई हो 
बहन जैसा ननद से भी स्नेह होना चाहिए ,
ससुराल में भी इक मायका होना चाहिए ........
हर बात में कोई रोक-टोक न हो
किसी बात का कोई विरोध न हो 
आपसी रिश्तो में तालमेल होना चाहिए ,
ससुराल में भी इक मायका होना चाहिए..
     

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