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वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



हाइकु
ठूँठ हूँ अभी


डॉ0 सुरंगमा यादव ,


                 

 1	

ठूँठ हूँ अभी
वक्त मेरा था कभी
मैं भी हरा था

 2	

ठूँठ हूँ अभी
पक्षियों की आस था
छाया भरा था

 3	

ठूँठ हूँ अभी
डाल हिंडोला कभी
झूले थे सभी

 4	

ठूँठ हूँ अभी
था कभी फलदार
सही थी मार

 5	

ठूँठ हूँ अभी
सहने को तैयार
आरी का वार   

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