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वर्ष: 2, अंक 38, जून(प्रथम), 2018



बेटी (हाइकु )


महेन्द्र देवांगन "माटी"


 
(1)  भेद ना कर 
      बेटी बेटा समान
       अपना मान ।

(2)  बेटी पढ़ती 
       विकास है गढ़ती
        आगे बढ़ती ।

(3)   चुप रहती 
        सब कुछ सहती 
       सदा हंसती ।

(4)  काम करती 
       कभी नही थकती 
      ख्याल रखती ।

(5)  खुद पढ़ती 
        भाई को भी पढ़ाती
       गाना सुनाती ।
 

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