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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 65, जुलाई(द्वितीय), 2019

मात ले कर क्यों चलें

डॉ० अनिल चड्डा

अधूरी इच्छा साथ ले कर क्यों चलें? अंधेरों की सौगात ले कर क्यों चलें?? मन में सौ विचार आते-जाते हैं, सपनों की बारात ले कर क्यों चलें? कौन मिलता है यहां बिन स्वार्थ के, स्वार्थी को साथ ले कर क्यों चलें? हर तरफ भरमार है दीवानों की, पगलों से जजबात ले कर क्यों चलें? उठ नहीं पायेंगे हम गिरने के बाद, दिल में अपने मात ले कर क्यों चलें?


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