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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



दर्द जुदाई


मुकेश कुमार ऋषि वर्मा


  
दर्द जुदाई सह नहीं पाते हैं 
किसी के सामने आंसू बहा नहीं पाते हैं 

प्रेम की डोरी तुमसे लगाई 
उसे तोड नहीं पाते हैं 

सूनी अँखियाँ राह देखतीं 
किसी से कुछ कह नहीं पाते हैं 

जीना हुआ बहुत मुश्किल 
करके तुम्हें याद मर भी तो नहीं पाते हैं 

एक आस लगी छोटी सी 
उस आस के सहारे जीए जाते हैं 

तुम आओगे एक दिन 
रब से यही दुआ किए जाते हैं 

दर्द जुदाई सह नहीं पाते हैं 
किसी के सामने आंसू बहा नहीं पाते हैं 

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