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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



दर्द से सभी को इश्क है प्यारे


डॉ० अनिल चड्डा


 
दर्द से सभी को इश्क है प्यारे,
अकेलापन कोई कैसे गुजारे।

लुभाती हैं यादें हमें हर कदम पर,
खुशियां कोई किस रस्ते पुकारे।

झोंक में उनको दे बैठे जुबां थे,
दिल की नादानी कोई कैसे सँवारे।

दोस्त बनते नहीं, दुश्मनों के जहाँ में,
भार दिल का कोई कैसे उतारे।

खत्म नहीं होते कभी शिकवे यहां पर,
सुकूँ पहुंचेगा कैसे दिल के द्वारे।

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