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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



सवेरे का स्वागत


रामदयाल रोहज


                                                         
मुर्गे ने जोर - जोर से अलार्म बजाकर सबको जगाया
भोर के तारे ने आकर बाँटी बधाई -
सवेरा महाराज पधार रहे हैं 
तभी सवेरा उतरने लगा ऊँचे पहाड़ से
अपना चमकीला घोड़ा लेकर
एक हाथ में घोड़े की लगाम 
और दसरे में सूर्य टॉर्च
सिर पर सुनहरे बादल का मुलायम साफा
चमकीला धोती कुर्ता पहने
टॉर्च का उजाला करते आगे बढा
कि तेज रोशनी में 
नभ के बालों की शोभा बढाने बैठे
जुगनू से तारे छुप गये 
काले घुंघराले बालों में
मानो इनकी आँखें चौंधियाने लगी हो
वातावरण हो गया शीतल सुहावना
पूर्वी गौलार्ध्द हुआ पूर्ण प्रकाशमय
मकरंद - सुरापान कर चला मस्ती में समीर
नन्ही नन्ही कलियों ने बनाई खूबसूरत रंगोली
रंग बिरंगे फूलों के रंगों से
और आसमान को नापती इमारतें भी 
करने लगी  नमस्कार
फसलों ने तालियाँ बजाकर किया स्वागत
फाख्तों ने ढोल बजाया 
गोरैया सखियों ने गाए स्वागत गीत
पेड़ पहना रहे हैं 
महकती मंजुल वल्लरी मालाएँ
सवा पहर का स्वागत समारोह 
अब हुआ संपन्न |                        

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