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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



बिन पानी सब सून


पवनेश ठकुराठी ‘पवन’


                                                      
प्यासा है दिन, प्यासी है रतियाँ
प्यासा महीना जून
सखी री बिन पानी सब सून।
प्यासी धरती प्यासा अम्बर
प्यासी नदियाँ, गाड़ए समंदर
प्यासा  नहरों का जुनून
सखी री बिन पानी सब सून।
प्यासी नल-नौलों की नगरी
प्यासी दादी माँ की गगरी
प्यासा पप्पू अफलातून
सखी री बिन पानी सब सून।
प्यासे जीव जंगल के सारे
प्यासे पंछी प्यारे-प्यारे
प्यासा हरा-भरा जामुन
सखी री बिन पानी सब सून।
प्यासा गाँव शहर सारा
प्यासा आंगन घर सारा
प्यासा दिल्ली, बांबे
और प्यासा देहरादून
सखी री बिन पानी सब सून।

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