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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



अबकी बार जून में


पवनेश ठकुराठी ‘पवन’


                                                      
सूरज गुस्से में हुआ बावला
पप्पू गोरा हुआ सांवला
पसीने छूटे काया से
मार्निंग, इवनिंग, नून में
अबकी बार जून में।
लू,आंधी की हुई बहार
सूखे ने मारी दहाड़
दुल्हा,दुल्हन चढ़े पहाड़
भाग-भाग हनीमून में
अबकी बार जून में।
हाल-बेहाल हैं सबके भाई
सबको मार रही गरमाई
सब अलसाये, सब बेचैन
नहीं कोई सुकून में
अबकी बार जून में।

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