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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



गर्मियों में नदी का गीत


पवनेश ठकुराठी ‘पवन’


                                                      
जब से हुई हैं गर्म हवाएं
जब से हुई हैं बेशर्म फिजाएं
बूंदों से रिश्ता टूट गया है।
मेरा किनारा कहां है
उद्गम सितारा कहां है
समुंदर भी मुझसे रूठ गया है।
देखो जर्जर काया मेरी
बस रह गई छाया मेरी
वसनों का दामन भी छूट गया है।

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