Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



अंधेरा मटमैला


अशोक बाबू माहौर


 
अंधेरा मटमैला 
सूना घर 
साँसें अचानक थमीं 
जैसे निचोड़ लीं 
किसी अनजान ने। 
खामोश निगाहें 
टटोलती राहें इधर उधर 
किंतु चारों तरफ 
सन्नाटा तांडव करता 
पाँव पसारता 
अंधा बन, 
छाती पर चढ़ जाता 
धीरे धीरे 
समाता रूह में 
निडर बहुचाल धारण कर।                     

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें