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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



हाइकु


गुरुदेव प्रजापति


 
1.
पंख फैलाके उड़ जाता शहर दंगल होते |
2.
घर आकर हाथ जोडके बोले हमे जीताना !
3.
साबरमती आंसु बहाने लगी गांधी गायब !
4.
धर आकर बोले,कितने लोगे ? एक मत के |
5.
सत्ता की रोटी कौन सेक रहा है ? हमे लडाके |
6.
हाथ मे लिए मशाल,चल पडी जागृत नारी !
7.
तालाब देख मेढक बोला,अरे ! सागर देखो |

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