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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



कर तैय्यारी जाने की


पीताम्बर दास सराफ" रंक"


                                                      
आ गये दिन जाने के
कर तैय्यारी जाने की
छोड़ मोहमाया जग की
चाह रख उसे पाने की।।१।।
अब तक न पूजा ग़र उसे
अब लगा उससे नेह तू
ला उसे अपनी स्मृति में
गढ़ उसका मूर्त स्वरूप तू।।२।।
याद कर अपने जनम को
उसकी कृपा ही थी वह
तेरे पिछले जनम के
करम की नियति है यह।।३।।
देख तूने जो भी किया
उसका फल तू पा चुका
तू कहाँ जायेगा कल
इसका निर्णय हो चुका।।४।।
कर स्वागत उस मौत का
हाथ जोड़ प्रणाम कर
कर निवेदन बिना कष्ट के
ले तेरे वो प्राण हर।।५।।

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