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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



तुमको पलको पे सजा लूं मैं!


प्रीतीश्री वास्तव


                                                      
तुमको पलको पे सजा लूं मैं!
अपनी निगाहो मे बसा लूं मैं!!

दो इजाजत जो हमको थोड़ी !
पल भर को करीब आ लूं मैं!!

छूकर देखूं मै तुमको करीब से!
तुमकाे जरा अपना बना लूं मैं!!

पिघल जाऊं मैं शमा की तरह!
कसक अपने दिल की बुझा लूं मै !!

फना हो जाये सारी हया मेरी!
नकाब चिलमन से हटा लूं मै!!

आदाब बजा आयें निगाहें मेरी!
गीत औ गजल याद में गा लूं मैं!!

ख्बाव में आओ पल भर के लियें!
साथ उम्रभर का तेरा पा लूं मैं!!

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