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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



हृदय को बेधने वाले भी तीर होते हैं


डॉ० डी एम मिश्र


 
कितने अनपढ़ भी हैं देखे कबीर होते हैं
ग़रीब  लोग भी दिल के अमीर होते हैं।

ऐसे बच्चे भी हैं एकलव्य सरीखे यारो 
जो , ज़माने के लिए इक नज़ीर होते हैं।

कभी घायल नहीं हुए तो आप क्या जानें 
हृदय को बेधने  वाले भी तीर होते हैं।
              
इसी को दोस्तो जम्हूरियत कहा  जाता
चोर -उचक्के भी देश के वज़ीर होते हैं ।
         
जिसे भी देखिये वो आँख  मूँद लेता है
न जाने क्यों हमीं इतने अधीर होते हैं।

लीक से हट के चलोगे तो लोग बोलेंगे
लोग सदियों से पीटते लकीर होते हैं।

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