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वर्ष: 2, अंक 40, जुलाई(प्रथम), 2018



काले बादल आये हैं


डॉ. प्रमोद सोनवानी पुष्प


                                                               
काले-काले बादल देखो ,
नभ में घिर-घिर आयें हैं ।
पानी की गगरी भर-भरकर ,
देखो कितना लायें हैं ।।1।।

सुंदर-सुंदर चित्र बनाकर ,
सबके मन को हरते हैं ।
मस्ती में चलते हैं हरदम ,
जग में खुशियाँ भरते हैं ।।2।।
 

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