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वर्ष: 3, अंक 52, जनवरी(प्रथम) , 2019



कर्म करो


महेन्द्र देवांगन माटी


 
कर्म किये जा प्रेम से  , चिन्ता में क्यो रोय ।
जैसा तेरा कर्म हो , वैसा ही फल होय ।।

सबका आदर मान कर , गीता का है ज्ञान ।
बैर भाव को छोड़कर  , लगा ईश में ध्यान ।।

झूठ कपट को त्याग कर , सब पर कर उपकार ।
दया धरम औ दान कर , होगा बेड़ा पार ।।

धन दौलत के फेर में  , मत पड़ तू इंसान ।
करो भरोसा कर्म पर , मत बन तू नादान ।।

कंचन काया जानकर , करो जतन तुम लाख ।
 माटी का ये देह है ,    हो जायेगा राख ।।		 
 

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