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वर्ष: 3, अंक 52, जनवरी(प्रथम) , 2019



साफ दिल रहिए


डॉ आरती कुमारी


 
साफ दिल रहिए खुश सदा रहिए
जैसे होंठों पे एक दुआ' रहिए

मुझको अपना बना लो जैसी हूँ
ये न कहिये कि फूल सा रहिए

ऐसे रहिए कि क़द ज़मीं से लगे
ये क्या मतलब कि चर्ख़  सा रहिये

दर्द सहते हुए बशर के लिए
तपते सहरा में अब्र सा रहिए

ये मोहब्बत बुरी है शय जिसमें
आतिशें ग़म में बस फ़ना रहिए
 

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