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वर्ष: 3, अंक 52, जनवरी(प्रथम) , 2019



मजदूर


सुरेश सौरभ


आज जब प्रधानाचार्य ने घंटी लगाई, तब उन्हें एक टीचर ने पानी पिलाया। फिर सारे अध्यापक अपनी-अपनी कक्षाओ की सफाई करने लगे तब यह नजारा देखकर सारे बच्चे हतप्रभ थे। कुछ बच्चों ने अध्यापको का उतरा- उतरा चेहरा देखकर पूछा- ऐसा क्यों ? तब उन्होंने जवाब दिया- प्राइवेट कालेज प्रबंधक के डंडे- डोर से चलतें हैं। आज उनकी डोर से सारे चपरासी बंधे हैं क्योंकि उनके घर में कोई फंग्शन है।


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