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वर्ष: 3, अंक 52, जनवरी(प्रथम) , 2019



मधु स्मृतियाँ


सुशील शर्मा


               
तुम्हारे ध्यान में मधु स्मृतियों का ,
शत-सहस्त्र पल्लवन। 
तुम्हारा अप्रतिहत आह्वान
स्पंदित प्राण अर्धस्फुट,
अंत:स्वर आलोक जगाते स्मृति का। 
हरसिंगार गंध उन्मद मन। 
मुग्धा मिठास सिहरन-भर उल्लास। 
स्तब्ध,लयबद्ध जीवन तृप्तिमय। 
तुम्हारा आलम्बन। 
अनुशासन के अनुच्छेद,
शब्दों के विच्छेद। 
शरद् के भोर सा घना सिमटा,
स्थिर समर्पित ,
स्वयं विसर्जित,
सदा द्रवित,
शून्य से शून्य तक। 
व्यथा के तम में,
आलोकित स्फुरित ,
 मेरे प्रेम का उद्वेग। 
वेदना की टीसों में 
निश्चल नि:स्पंद!
टिमटिमाती ज्योति,
प्रणय अनुनाद की। 
   

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