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वर्ष: 3, अंक 52, जनवरी(प्रथम) , 2019



युवाशक्ति


रामदयाल रोहज


              
केहरि कमर को तोङ दे
इस देश को नव मोङ दे
टूटे जनों जोङ दे
पापों का भांडा फोङ दे
तुझमें वो शक्ति है जो
पर्वत को भी करती ध्वस्त है
धरती उठा दे जोश में मजबूत तेरे हस्त है
आकाश को पैरों तले पल में दबा सकता तूं
अहंकार का ताकत से अपनी नाम मिटा सकता तूं
इस देश का है भार अब मजबूत तुम कन्धे करो
बच जाए अपना देश मिल ऐसे कोई धन्धे करो
आगे तुम्हारे कौन टिक पाएगा जो तूं चुस्त है
तोङे है तुमने दुर्ग जुल्मी
को किया जो पस्त है
बेईमानी धोखा जुल्म के गढ आज भी फल रहे
वादे भरोसों से यहाँ नेताजी भी है टल रहे
जब आग है सीने में तो दुनिया बचा तूं
अपनी गर्म सांसों से ही प्रलय मचा सकता तूँ
हो एकजुट पातल में गिरि को गङा सकते हो तुम
औ कुर्सियाँ क्या चीज है
समन्दर उङा सकते हो तुम
धारा नदी की मोङ दे
दुनिया को पीछे छोङ दे
तूं सर्वशक्तिमान है
घने घन को भी तूं निचोङ दे |
 

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