Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 52, जनवरी(प्रथम) , 2019



मैं पिता हूं


डॉ ०नवीन दवे मनावत


               
मैं कितना जिम्मेदार हूं
अपने प्रति 
परिवार के प्रति
मैं एक पिता हूं?

बना ,बिगडा 
उत्तरदायित्व 
लेकर चला अपने उपर 
वक्त- बेवक्त 
झेला जिंदगी को

आज पौध बडी हुई
मेरे आंखो समक्ष
जिम्मेदारी 
पहाड सी खडी

टूटकर बिखरने जैसा 
समय सामने,
पर मैं विचलित नहीं
अचल सा अटल रह 
धकेलाता  जिंदगी को

पौध आज 
हरिभरी है 
खुशियों की 
बारीश हो रही है

यह परिणाम
मेरा अटल दायित्व 
या अटल विश्वास 
या मोह 
मैं नहीं जानता

मैं वहीं पिता 
कितना प्रसन्न हूं
कितना क्षोभग्रस्त 
मैं नहीं जानता

कल एक और जिम्मेदारी
आवाज देगी
मैं तैयार खडा हूं
स्वागत के लिये
क्यों कि मैं 
पिता हूं.........
  

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें