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वर्ष: 3, अंक 52, जनवरी(प्रथम) , 2019



चरित्र......


डॉ ०नवीन दवे मनावत


               
ओस  की बूंद 
सौन्दर्य देती है
जब तक 
तब तक कि
वह टीकी है उस पर

एक क्षणिक
आभास देती है
संपूर्ण ब्रह्मांडमय प्रकृति का
वस्तुगत बनने तक

सूरज स्वयं
आभासित होना चाहता है
प्रकृत्योचित बनने को 
विलिन होने को

सड़क पर 
घना कोहरा 
मिटा देता है
सूरज की आभा को 
एक क्षणिक 
समय की ओर से

हम बूंदवृत 
ओस  बने 
यही 
चरित्र है.....
  

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