Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 52, जनवरी(प्रथम) , 2019



साचे दीनदयाल


जेठाराम रोहज "सागरनाथ"


 
सतगुरु आ बडे़ करतार हो,मै आयो शरण तुम्हारी 
दास जान कृपा करो,लेवो सुधि हमारी
लेवो सुधि हमारी,दास पे कृपा कीजो
मांगुं भक्तिदान,चरण की सेवा दीजो
करो गुरुदेव अब कृपा, द्वारे आ पडा़ थारे
दर दर भटकर आया, गुरु जैसा कोई नही पाया
ऐसी हो आपकी माया, चौरासी पल में ही टारे
 मंदिर मस्जिद में पूजा, गुरु बिना देव नही दूजा
ऋषि और मुनियों से बूझा,सरण सतगुरु की है सारे
आया हूं सरण मै थारी,सुन लीजो अरज म्हारी
ऐसी ही मेहर करी भारी,कर्म बन्धन काट डारे
 गुरु गंगानाथ अब पाया, सागरनाथ आनन्द मेंं छाया
सदा गुरुदेव का गुण गाया,वे ही भव सागर से तारे
चालो सुरता बावरी,तूं कर चलने को ख्याल
सतगुरु हेला देत है,वो साचे दीनदयाल।
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें