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वर्ष: 3, अंक 52, जनवरी(प्रथम) , 2019



शहादत दिवस


डॉ दिग्विजय कुमार शर्मा 'द्रोण'


 
देश में टेरेरिस्ट का आना,  
बनाया गया बम्बई को निशाना।
छब्बीस नवम्बर के दिन, 
मुंबई जली जब धूँ धूँ होकर।
रास्ते समुद्री नाप के आये, 
थे रहमान, जाकी, कसाब युगल।

बमबारी गोलीबारी की, 
और बनाये सभीथे बंधक।
ऐके सैंतालिस वाली गन से ,
फैलाई बारूद से दहशत।

चाह थी लश्कर ऐ तैयबा, 
रौंदे सब हिन्दुस्तानी जनता को।
नीच कसाब से  कसाई ने, 
खूब दिखाई थी हैवानियत।

गिरा दी लाशें धड़ा धड़, 
अधिक तीन सौ से ज्यादा हुए घायल।
उजड़ी मांगें,सूनी हुई गोदें, 
स्तब्द्ध जनता हुई विह्वल।

आतंकी गैंग ने अटैक किये, 
पहल शिवाजी टरमीनल पर।
अजमल और खान यहाँ जैसेे, 
यम के दूत आये बनकर।

अगला टारगेट बना नरीमन हॉउस, 
ताबड़तोड़ गोलीयाँ चलाई वहां पर।
देर रात कोे नौ से ग्यारह के बीच,
कैफे पहुंची आतंकी टोलियाँ।

फिर होटल ओबेरॉय पहुंचे, 
अपनी धुन में ये आतंकी गुंडे।
नँगा नाच मौत का कर गन्दा खेल,
लटकाए फांसी पर फंदा ले।

निरंतर नरसंहार रहे करते, 
गए ये हॉस्पिटल बम्बई के कामा।
धीर वीर हेमंत करकरे, 
शहीद यहीं हुए  ये सब और मामा।।

आधी रात को जब फटा बम्ब, 
ताज होटल खड़ा ही दहल गया।
खूंखार, निर्दयी,हैवानी दरिंदों ने, 
मुसलमानियत का किया नापाक

देख सभी चार दिन मौत का मंजर, 
जग  दुखी हो साँसें रोक गया।
उन भेड़ियों की बर्बरआत्मा, 
नहीं तनिक भी पिघली वह।

दस के दस थे वो आतंकी, 
मुहम्मद कसाब एक  बचा ज़िंदा।
पाकिस्तानी ले  साजिश गहरी, 
नापाक इरादा मन गंदा जहरी।

है आज उस दर्दनाक दिन की बरसी, 
श्रद्धा सुमन पुष्प कर मैं अर्पित।
सरहद के हर प्रहरी भाई को, 
सादर शत शत वंदन करूं सर्वस्व अर्पित।

 

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