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वर्ष: 3, अंक 52, जनवरी(प्रथम) , 2019



सिर्फ कहने से कुछ नहीं होगा


नरेंद्र श्रीवास्तव


 
क्या हो रहा है ,सिर्फ कहने से कुछ नहीं होगा।
कुछ कीजिये अब चुप रहने से कुछ नहीं होगा।।
जो कर रहे हैं बगावत,उनके खिलाफ में।
अखबार में खबर बस छपने से कुछ नहीं होगा।।
मुसीबतें जो आयी हैं,उन्हें खत्म करो जड़ से।
मुसीबतों से बच के निकलने से कुछ नहीं होगा।।
रहिये न चुप भीड़ में, चिल्लाईये जोर से।
डंडों की फटकार से,डरने से कुछ नहीं होगा।।
किया चंदा जो चंदा इकट्ठा, मकसद से उलीचिये।
निज काम के हित कोष भरने से कुछ नहीं होगा।।
लगती है तो कालिख लग जाने दो यारो।
भलाई में कालिख लगने से कुछ नहीं होगा।।
पैदा करो हौसला स्वाभिमान का दिल में।
बिन हौसले के आगे,बढ़ने से कुछ नहीं होगा।।
 

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