Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 55, फरवरी(द्वितीय) , 2019



हँसी वो ख़्वाब के धोखे में .....


सुशील यादव दुर्ग


 
हुनर का फूलता-फलता सा दरख्त बेच आया
हँसी वो  ख़्वाब के धोखे में  नीयत बेच आया

फिरा रोटी  जुगाड़ में आदमी दर ब दर सहमा
गमो की एक ही बारिश असलियत बेच आया

किसी से  बात कहने की अजब घबराहटो में
नहीं जाना कहाँ आखिर शराफत बेच आया

टके-दो में, जहां सारा खरीद लिया हो सपने
वही अपना वजूद कहीं हकीकत बेच आया

मुसीबत का पहाड़ नहीं था उसके सामने कुछ
हुआ क्या जो  सलीका आज हिम्मत बेच आया

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें