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वर्ष: 2, अंक 31, फरवरी(द्वितीय), 2018



बज़्म में गीत गाता हुआ कौन है


गंगा धर शर्मा 'हिन्दुस्तान'


 
बज़्म में गीत गाता हुआ कौन है,
लूटता यूँ दिलों को भला कौन है।

कह रहे हैं परम-आत्मा कौन है,
देखना भाइयों जा-ब-जा कौन है।

सोचिये आसमाँ को करीबे उफ़क,
इस जमीं की तरफ खींचता कौन है।

देखना सिर्फ है सर उठे हैं कई,
जुल्म की बन्दिशें तोड़ता कौन है।

राज-रावण में सच बात पर लात है,
खींच लीजे जुबाँ , बोलता कौन है।

उर्वरा हो जमीं उसपे बादल घना,
बीज है फूटता, रोकता कौन है।

खानदानी है जो ऊंचे कुल से जुड़ा,
मुफलिसी में है वो , मानता कौन है।

हुक्मरानों बिना दहशती में भला,
तालिबे इल्म को ठेलता कौन है।

क़त्ल के बाद मुर्दा फक़त लाश है,
नाम दे के दलित बेचता कौन है।

जो खिलौने मिले तो उछलता हुआ,
फूल सा मुस्कुराता हुआ कौन है।

देखिये ये सियासत की जादूगरी,
कर रहा कौन है , झेलता कौन है।

गोर में सो रहा हूँ बड़ा फ़ैल कर, 
हूँ मैं वाहिद यहाँ ,दूसरा कौन है।

देख हिन्दोस्तान आप ही से कहे, 
है सभी तो मेरे अलहदा कौन है।
 

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