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वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



हर लम्हा खूबसूरत बना लिया हमने


प्रीती श्रीवास्तव


 
जिन्दगी का हर लम्हा खूबसूरत बना लिया हमने।
जो भी प्यार से मिला उसे गले लगा लिया हमने।।

गुजरे हुये वक्त को याद क्या करना शामो सहर।
कांटो के बीच से अपना गुलाब चुरा लिया हमने।।

चांद तक का सफर करना है कठिन बहुत मेरे लिये।
ख्वाबो में सही दिलो का दस्तूर निभा लिया हमने।।

जमाना कहे तो कहता रहे बेशक दीवाना हमको।
हमारी मंजिल तक पहुचंने का रास्ता पा लिया हमने।।

डरना कैसा जमाने के तानो से ओ मेरे हमसफर।
हमारे दर्द का लोगो को सहज हिस्सा बना हमने।।

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