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वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



प्यार आज व्यापार हो गया


डॉ० अनिल चड्डा


 
अकेलापन दुश्वार हो गया,
प्यार आज व्यापार हो गया।

तिनका-तिनका घर बनाया
कौन ये हकदार हो गया।

सोये थे सपनों की खातिर,
सोना ही दुश्वार हो गया।

किसको बोलें दिल की बातें,
भावना का बाज़ार हो गया।

दर्द ही को समझे नहीं जो,
वो हमारा यार हो गया।

फूटी आंखों जिनको न भाएँ,
उनका ही दीदार हो गया।
 

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