Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



पेट का सवाल


सतीश राठी


‘’ क्यों बे ! बाप का माल समझ कर मिला रहा है क्या ? ‘’ गिट्टी में डामर मिलाने वाले लड़के के गाल पर थप्पड़ मारते हुए ठेकेदार चीखा |

‘’ कम डामर से बैठक नहीं बन रही थी ठेकेदार जी ! सड़क अच्छी बने यही सोचकर डामर की मात्रा ठीक रखी थी | ’’ मिमियाते हुए लड़का बोला |

‘’ मेरे काम में बेटा तू नया आया है | इतना डामर डालकर तूने तो मेरी ठेकेदारी बन्द करवा देनी है | ‘’ फिर समझाते हुए बोला – ‘’ ये जो डामर है , इसमें से बाबू , इंजीनियर , अधिकारी , मंत्री ,सबके हिस्से निकलते हैं बेटा ! ख़राब सड़क के दचके तो मेरे को भी लगते हैं |.. ..चल इसमें गिट्टी का चूरा और डाल | ” मन ही मन लागत का समीकरण बिठाते हुए ठेकेदार बोला |

लड़का बुझे मन से ठेकेदार का कहा करने लगा | उसका उतरा हुआ चेहरा देखकर ठेकेदार बोला – ‘’ बेटा ! सबके पेट लगे हें | अच्छी सड़क बना दी और छह माह में गड्ढे नहीं हुए तो इंजीनियर साहब अगला ठेका दूसरे ठेकेदार को दे देंगे | इन गड्ढों से ही तो सबके पेट भरते हैं बेटा ! ’’


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें