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वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



हायकू–शेनर्यू
(पाँच–सात–पाँच त्रिपंक्ति की सतरह वर्णी जापानी पद्य शैली छंद)
श्रद्ध्याग्निः


डॉ• सच्चिदानन्द झा


 
हे श्रद्ध्याग्निः
जब कुछ भी ना था
मात्र तुम थे।
ब्रह्मा शंकर
विष्णु प्रभृति ना थे
किन्तु तुम थे॥
सूयॅ चन्द्रादि 
 कुछ भी तो नहीं थे
मात्र तुम थे।
ना अंतरिक्ष
मात्र था अंधकार 
किन्तु तुम थे॥
निःसृत हुई 
तुमसे श्यामा ऊजॉ
भैरवाकार।
श्यामा हो गई
उत्पन्न प्रकृति हो
वृहदाकार॥
महा प्रकृति 
से पंचभूत लिया
सृष्टि आधार।
अद्भुत हुई 
सृष्टि रंग–विरंगी 
और आकार ॥

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