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वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



हायकू–शेनर्यू
(पाँच–सात–पाँच त्रिपंक्ति की सतरह वर्णी जापानी पद्य शैली छंद)
संबोधन


डॉ• सच्चिदानन्द झा


 
सखी‚ पत्र में
लिखूं क्या संबोधन
यदुवंशी को ।
निज मन का
संदेश कैसे भेजूं
वृष्णिवंशी को ॥
‘कृष्ण ’ लिखूं तो
टूटती है शिष्टता
होगी धृष्टता ।
‘नाथ ’ लिखूं तो
छोटापन व ‘सखा ’
से तटस्थता ॥
प्रेम भी मिथ्या 
लगेगा नितान्त ही
‘स्वामी’ लिखूं तो।
प्रणय होगा
नष्ट होते घायल
‘ब्रह्म ’ लिखूं तो॥
                          

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