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वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



ताऊ की दुकान


रामदयाल रोहज


 
डिबिया सी परचून की
है ताऊ की दुकान
गाहक आते है खूब यहाँ
पर पूरा नहीं सामान
रातभर चूहे यहाँ
डंका बजाते
दिन चढे ताऊ सदा
झाङू लगाते
खींचते बीङी के कश
भट्टा धुकाते
फिर दीया करते
अगरबती लगाते
पोपले मुख में डली
गुङ की घुमाते
सूने धेनू वत्स को
दाना खिलाते
साँड बल अपना
गली में आजमाते
जैसे दो मल्ल अपना अपना
दम दिखाते
ले रहे आनन्द जन
हल्ला मचाते
पास दो अश्वत्थ खङे
ताली बजाते

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