Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 30, फरवरी(प्रथम), 2018



विश्वास


विमल शुक्ला


                    

लक्ष्य कितना भी बड़ा,
अनभ्यस्त पर्वत सा खड़ा,
समझो तुम्हारे पास है,
खुद पर अगर विश्वास है ।।
निराश्रयता से घिरे,
हर चेष्ठा पर तुम गिरे,
कितनी भी आयीं आँधियाँ,
सौ बार तुम टूटे जुड़े,
फिर भी नही विचलित हुए,
मंज़िल तुम्हारी दास है,
खुद पर अगर विश्वास है ।।
कष्ट में रोया नही,
अक्लांत तू सोया नही,
दुविधाओं से दो हाथ कर भी,
मार्ग तू खोया नही,
तो साक्षी है यह धरा,
करता नमन इतिहास है,
खुद पर अगर विश्वास है।।।            
इस पर क्लिक करके देखें



Rani Saahiba Printed
Art Bhagalpuri Silk Saree

Amayra blue floral printed long length
anarkali Cotton kurti for womens

Vaamsi Crepe Digital Printed Kurti
(VPK1265_Muti-Coloured_Free Size)

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com