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वर्ष: 2, अंक 30, फरवरी(प्रथम), 2018



पैरों की पायल


रोहिताश बैरवा


 

तेरी आशा ही मेरा निशाना बन गई,
तेरी बाते ही मेरा सहारा बन गई|
तेरी दुआ ही मेरी जिन्दगी बन गई,
तेरी पैरो की पायल माँ मेरे सर का ताज बन गई||
 
कठिनाइयों में भी तेरा यूं मुस्कुराना,
ग्रीष्म ऋतु में भी तेरा फूलो की तरह खिलना| 
तेरी मुस्कराहट मुझे कुछ यु प्रेरणा दे गई,
तेरी पैरो की पायल माँ मेरे सर का ताज बन गई||
 
मेरी हर गलती को तू यूं भुला गई,
मेरी ख़ुशी की खातिर तू हर गम से लड़ गई|
मुसीबत में तू मुझे सीने से लगा गई,
तेरी पैरो की पायल माँ मेरे सर का ताज बन गई||
 
वो मंदिर गई दुआ मेरी उम्र की मांग आई,   
वो माँ थी जो बेटे के लिए आंच से खेल आई|
वो अपने बेटे को कुछ ऐसा अजब प्यार कर आई,
तेरी पैरो की पायल माँ मेरे सर का ताज बन गई||
 
अपने हर फर्ज को तू बाखुबी निभा गई,
अपने बच्चों को तू निर्लिप्त प्यार कर गई|
तेरी हर ख़ुशी को तू बच्चों पर लुटा गई,
तेरी पैरो की पायल माँ मेरे सर का ताज बन गई||                                       


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