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वर्ष: 2, अंक 30, फरवरी(प्रथम), 2018



नयी सोच


नीना छिब्बर


                    
हम दिखे
हम  मिले
हम बोले
हम डोले
हम नाचे
हम गाए
हम लडे
हम मुस्कुराए
हम एक हुए
हम समझे
हम निकट आए
हम जोडी बने
हम फिर हँसे
हम फिर रोये
हम लडे फिर से
हम मौन हुए
हम अडे फिर से
हम विलग हुए
हम अलग हुए
हम बट गये
हम को सब ने टोका
हम को लम्हों ने रोका
हम अडे रहे,हम डटे रहे
हम झटके से अलग हुए
हम बडे ,आगे ,आगे
मुस्कुराते मुस्कुराते ,नयी डगर चले

न झिझक न मलाल न तनाव
हम खोजें बेझिझक नयी डगर।
इस पर क्लिक करके देखें



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