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वर्ष: 2, अंक 30, फरवरी(प्रथम), 2018



पहाड़ी महिलाऐं


मनोज कुमार 'शिव'


पहाड़ और 
पहाड़ी महिलाऐं 
होती है 
इक-दूजे का समरूप..
पहाड़ की 
विषम परिस्थितियों में भी
सहर्ष गाती है
वो जीवन संगीत...
पहाड़ देता है उन्हें 
विपत्तियों के समक्ष 
अडिग बने रहने 
का साहस...
वे चढ़ती हैं 
पहाड़ पर 
भारी बोझे समेत
किसी अनुभवी पर्वतारोही 
के माफिक,
हालांकि डिक्की डोलमा, 
बछेन्द्री पाल आदि नाम 
उनके 
कानों ने कभी नहीं सुने...
डंगरों को 
पत्तियाँ इक्ट्ठा करते 
जंगल में 
वो जब गाती हैं 
मधुर स्वरों में 
लोकगीत 
तो पहाड़ भी संग 
गुनगुनाने लगता है उनके...
बेशक 
बेजुबान है पहाड़
मगर समझते हैं
उनके हर जज्बात को...
पहाड़ी महिलाऐं 
माँगती है सुरक्षा 
चोटी पर विराजमान
देवगणों से,
पहाड़ 
उनके रक्षक हैं,
सुख-दुःख के साथी हैं..
इक-दूजे के बिन 
दोनों अधूरे हैं..

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