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वर्ष: 2, अंक 30, फरवरी(प्रथम), 2018



शासन के सिपाही


डॉ दिग्विजय शर्मा "द्रोण


     
 
कभी इनकी दोस्ती अच्छी 
न है अच्छी दुश्मनी।
इनसे बना कर रखना 
रहती सदा मज़बूरी अपनी।
ये कब बदल जाए 
कोई  इनका पता नहीं ।
जब भी ये प्यार से बात करें 
तो रहिये तुम  सावधान ।
ये कॉम है बड़ी खतरनाक 
बात बात पर देते हैं धमकी।
इनसे  जीतना मुश्किल ही नहीं,  
जोखिम भी नामुमकिन है।
इनके लिए है सब एक धान
पिछला हिसाब याद रखते हैं।
कभी अपने अंदर की बात 
और सच नहीं  बोलते।
इन्हें तो अपनी जी हजुरी
और अपनी 
जबरदस्ती तारीफ़ चाहिए।
ये सुन भले ही आपके मन की ले 
पर करेंगे अपने मन की ही हैं।
पब्लिक को डरा धमका कर
बड़े रौब से काम लेते हैं।
बगुला सी नज़र हमेशा जेब पर 
पैसे के लालच में रहती हैं।
बड़े घूस खोर बेदर्दी 
नही होते है समाज के हितकारी
पैसे के लिए झूठ को सच और
सच की झूट झट बना देते है।
कभी भरोसेमन्द नही होते
नेताओं से निभाते है रिस्तेदारी
गरीबो को नही छोड़ते
बख्शते  भी  नही चाहे 
वह  सच्चाई के लिए
गिड़गिड़ाए भारी
ऐसे है इस शासन के
रखवाले मौजूद सिपाही।
 

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