Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 30, फरवरी(प्रथम), 2018



लेकिन


वास्तुविद आशीष वैराग्यी


 

वो जानता था कि वो मेरे हिस्से में नही आएगा
और मैं जानता था चाह के भी हांसिल नही होगा वो
उसने रत्ती रत्ती पूरा आसमान मेरे हांथो में भरा और
मैंने आसमान का हर एक टुकड़ा 
उसी के दुप्पटे में बांध दिया।
वो जानता था किसी जंग को तैयार नही हैं वो
मैं चाहता तो लड़ जाता सारी दुनिया से 
लेकिन
एक दिल रखने को हाजरों दिल तोड़ नही पाया मैं,
तो उसने मेरी आँखों मे अपने प्यार की चमक भर दी
किसी रोज़ किसी जगह मिलने का वादा हुआ था बस
उसने वक्त पे आने को एक घड़ी बांधी थी कलाई पर
मैं वो घड़ी बांध के आया तो था उसी घड़ी उसी जगह 
लेकिन पता नही  वो वक्त से आगे था 
या मेरी घड़ी पीछे थी, 
फिलहाल मुलाकात न हो सकी।
वो कभी कोसता नही था 
मुझे मेरी आदतों के लिए जब तक मेरे साथ रहा 
और मैंने भी शिकायतों का बक्सा 
उससे छुपाकर अब कहीं दरिया में डूबा दिया है।
 
इस पर क्लिक करें ↓



Origin: Number 5 of the
Robert Langdon Series
       

आपके अचेतन मन की शक्ति
        

Bhagavad-Gita (Hindi)

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com