Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 30, फरवरी(प्रथम), 2018



खुशियाँ कानों में...


वास्तुविद आशीष वैराग्यी


 
खुशियाँ कानों में गुनगुना के जाती है अक्सर
मगर ये जिम्मेदारियों का शोर कुछ सुनने नही देता।

हवाओं से बांध रखा है आसमां तक एक मांझा
औऱ ये बेवक्त का बिखराव मुझे उड़ने नही देता।

जो खामोश हैं कभी ज़ुबान के सच्चे थे बहुत
हालातों का तजुर्बा अब मुझे कुछ कहने नही देता।

घर की खूँटियों पे सजाता हूँ रोज़ सुबह का उजाला
शाम दीवारों का अंधेरा, घर को घर रहने नही देता।

जिससे भी पूछा जीने नया तरीका सिखा गया 
और मेरा मरने का तरीका ही मुझे मरने नही देता।		 
 
इस पर क्लिक करें ↓



Origin: Number 5 of the
Robert Langdon Series
       

आपके अचेतन मन की शक्ति
        

Bhagavad-Gita (Hindi)

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

www.000webhost.com