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वर्ष: 2, अंक 30, फरवरी(प्रथम), 2018



कितना नाशाद हो गया है वो


यूसुफ़ रईस


                    

कितना नाशाद हो गया है वो
क्या  मेरे बाद  हो गया है वो।

भूल कर भी उसे न भूल सकूँ 
इस क़दर याद हो गया है वो।

अब तो आंखें भी अश्क़ बार नहीं  
कितना बरबाद हो गया है वो।

मेरी ग़ुरबत ने जो सिखाया है 
क्या सबक याद हो गया है वो।

जाये  ऊंची उड़ान पर जाये 
अब तो आज़ाद हो गया है वो।

जिस भी पत्थर से चोंट खाई है 
मेरी  बुनियाद  हो  गया है  वो।
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