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वर्ष: 3, अंक 51, दिसम्बर(द्वितीय) , 2018



क्यों


डॉ० अनिल चड्डा


 
खो जाने के डर से
तुम्हारे साथ हो लिया
तुमने 
पकड़ तो ली मेरी अँगुली
पर मेरे बोझ से
दुविधा में पड़ गए
कि कहीं
मेरा बोझ नहीं उठा पाए 
तो क्या होगा
अतः
बीच राह में ही
मेरी अँगुली छोड़
पकड़ ली 
किसी और की अँगुली
जो तुम्हारा बोझ उठा पाता
और मैं यूँ ही
राह भटक गया
अभी तक
राह नहीं मिल पाई मुझे
बताओ
इसका दोष
तुम्हे दूँ 
या
स्वयं को दोषी मानूँ
कि तुम्हारी अँगुली
पकड़ी ही क्यों

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